नीतीश बाबू से है महिलाओं को आस, यूपी में भी शराब होगी बंद!


कानपुर. लोहिया के वंशज लाव-लश्कर के साथ 2017 विधानसभा के चुनाव के लिए पूरी तैयारी पर जुट गए हैं। शुक्रवार को जेडीयू के पूर्व अध्यक्ष ने प्रेस वार्ता कर नेता जी को जमकर खरी-खरी सुनाई। वहीं मोदी सरकार के काम-काज पर प्रश्न चिन्ह लगाए। जेडीयू एक माह से कानपुर के आसपास की सीटों पर जातिगत आंकड़े जुटा रही है और इसी के फलस्वरूप शनिवार को बिहार सीएम के कुर्मी बाहुल्य घाटमपुर सीट पर पहुंचने से पहले हजारों की तादात में महिलाओं ने पहुंचकर यूपी में शराब बंदी को लेकर आवाज बुलंद की। आपको बता दें कि बिहार में जिस तरह सीएम नीतीश कुमार ने शपथ लेते ही तत्काल प्रभाव से शराब बंदी का आदेश दे दिया था, इसके चलते यूपी में भी कई समाजिक संगठनों और महिलाओं ने शराब बंदी को लेकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। महिलाओं का कहना है कि शराब के चलते कई घरों के चिराग बुझ गए हैं और लाखों की संख्या में बुझने की कगार पर पहुंच चुके हैं। रमईपुर ग्राम पंचायत की पूर्व महिला प्रधान कमला देवी ने बताया कि मेरे गांव से चार-पांच सौ महिला कार्यकर्ता सम्मेलन में पहुंची हैं। जो कि इस मंच से शराब बंदी की आवाज बुलंद कर रही हैं। उनका कहना है कि शायद यूपी के सीएम अखिलेश के कानों तक उनकी आवाज पहुंच जाए और यहां भी शराब पर पूरी तरह से प्रतिबंध लग जाए।

राम पंचायत कुरियां और परास से आई सैंकड़ों महिलाएं हाथ पर स्लोगन लिखे बैनर-तख्तियां लिए हुए थीं। हर एक पर यही लिखा था, कि नीतीश बाबू से है उम्मीद, यूपी में भी लगेगा 2017 में प्रतिबंध। कुरियां निवासी 12वीं की छात्रा ममता ने बताया कि उसके पिता शराब के लती थे, जिसके चलते मां अवसाद की शिकार हो गईं और इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। मां की मौत के बाद भी पिता ने शराब नहीं छोड़ी और लीवर डैमेज हो जाने की वजह से वो भी हम तीन बहनों को छोड़कर चले गए। वहीं कानपुर सहित अन्य जिलों में शराब बंदी को लेकर मुहिम चला रहे समाजसेवी राजेंद्र खरे, सौरभ श्रीवास्तव और मोहम्मद महमूद भी नीतीश कुमार के यहां पहुंचे हैं। महमूद ने बताया कि शराब बंदी को लेकर हम लोग यूपी के 50 से ज्यादा जिलों में मुहिम चला रहे हैं। जब बिहार के सीएम ने राजस्व घाटे की परवाह किए बिना अपने यहां शराब बंदी करवाई, वो ऐसा करने वाले पहले नेता है।

 

इस सेक्‍शन से अन्‍य ख़बरें

सुविचार

Total Visit: 279885