भूमि मूवी रिव्यू


हमारी रेटिंग 3.5 / 5
पाठकों की रेटिंग  4 / 5
 
कलाकारसंजय दत्त, अदिति राव हैदरी, शरद केलकर, शेखर सुमन
निर्देशक ओमंग कुमार
अवधि2 घंटा 15 मिनट
फ़िल्म के एक सीन में जब पुलिस इंस्पेक्टर पूछता है कि चाचा ही बोले जा रहा है, लड़की का बाप गूंगा है क्या? तो चाचा जवाब देता है कि हर लड़की का बाप गूंगा होता है। हालांकि इस फ़िल्म में लड़की का बाप गूंगा कतई नहीं है। वहीं उसकी बेटी भी अपने साथ हुए अन्याय पर चुप रहने की बजाय बारात लौटा कर विलन को करारा जवाब देती है, जो सोचता है कि वह अपनी शादी वाले दिन मुंह किस मुंह से खोलेगी।

संजय दत्त के जेल से लौटने बाद उनकी कमबैक फिल्म को लेकर फैन्स के बीच जबर्दस्त क्रेज था। कोई संजू बाबा की बायॉपिक फिल्म की बाट जोह रहा था, जिसका एक सीन उन्होंने जेल से निकलते ही शूट किया। वहीं कोई मुन्ना भाई सीरीज़ की अगली फिल्म की बात कर रहा था, लेकिन संजय दत्त ने इन सब फिल्मों को छोड़कर ओमंग कुमार की भूमि को चुना, तो इसके पीछे उनकी अपनी उम्र के मुताबिक रोल करने की चाहत थी। बाप-बेटी की कहानी पर बेस्ड इस फिल्म में लीड रोल कर रहे संजय असल जिंदगी में भी एक बेटी त्रिशला के पिता हैं। पिछले दिनों इस तरह की दो फिल्में मातृ और श्रीदेवी की मॉम रिलीज हो चुकी हैं, जिनमें मां अपनी बेटी के साथ हुए अन्याय के खिलाफ लड़ाई लड़ती है। इनमें से श्रीदेवी की मॉम को काफी अच्छा रिस्पॉन्स भी मिला। संजू की फिल्म की थीम भी कुछ ऐसी ही है, लेकिन यहां बेटी की लड़ाई बाप लड़ता है। हमारी सोसायटी में मां-बेटी के अलावा बाप-बेटी का रिश्ता भी बेहद खास होता है। निश्चित तौर पर संजू की फिल्म को इसका फायदा जरूर मिलेगा।

फ़िल्म की कहानी अरुण सचदेव (संजय दत्त) की है, जो अपनी बिना मां की बेटी भूमि ( अदिति राव हैदरी) के साथ आगरा में रहता है। अरुण अपनी बेटी को इतना चाहता है कि उसकी शादी पर हर बाराती को अपनी जूतों की दुकान से जूते पहनाता है, लेकिन जब अचानक बारात लौट जाती है, तो उसे पता लगता है कि धौली (शरद केलकर) ने अपने गुंडों के साथ मिलकर उसकी बेटी का रेप किया है। एक आम भारतीय की तरह अरुण और भूमि पुलिस और अदालत के चक्कर भी लगाते हैं, लेकिन वहां भी उन्हें इंसाफ नहीं मिलता। और तो और भूमि और अरुण सब कुछ भुला कर नई जिंदगी जीना चाहते हैं, तो दुनिया उन्हें जीने नहीं देती। आखिर बाप-बेटी अपने साथ हुए अन्याय का बदला कैसे लेते हैं? इसका पता आपको थिएटर में जाकर ही लगेगा।

संजय दत्त ने फिल्म से जबर्दस्त वापसी की है। खासकर अपने बेटी के साथ बिताए पलों में बिंदास और विलन को सबक सिखाने के दौरान बेहद खतरनाक, दोनों ही अंदाज में वह पर्दे पर बेहतरीन लगे हैं। एक फ़िल्म जिसका क्लाइमैक्स सबको पता है, उसमें दर्शकों को आखिरी सीन तक सीट पर रोकना आसान नहीं होता। हालांकि फ़िल्म का क्लाइमैक्स खूबसूरती से शूट किया गया है।

अदिति राव हैदरी ने फिल्म में संजय दत्त की बेटी का रोल बढ़िया तरीके से निभाया है। संजय दत्त जैसे मंजे हुए ऐक्टर के साथ अपने आपको साबित कर पाना आसान नहीं होता, लेकिन अदिति ने उन्हें पूरी टक्कर दी है। वहीं डायरेक्टर ओमंग कुमार ने अभी तक मैरी कॉम और सरबजीत जैसी बायॉपिक टाइप फिल्मों में अपना टैलंट दिखाया था। लेकिन अबकी एक बढ़िया ऐक्शन थ्रिलर डायरेक्ट करके उन्होंने दिखा दिया कि वह बायॉपिक जॉनर में टाइप्ड नहीं हुए हैं।

शरद केलकर ने फिल्म में विलन का रोल दमदार तरीके से किया है। उनके हिस्से में अच्छे डायलॉग भी आए हैं, लेकिन जब संजू अपनी फुल फॉर्म में आते हैं, तो वह किसी भी विलन से ज्यादा बड़े विलन लगते हैं। वही शेखर सुमन ने दोस्त के रोल में संजू का अच्छा साथ दिया है। फ़िल्म के गाने कुछ खास नहीं हैं। खासकर सनी लियोनी के आइटम नंबर को जबर्दस्ती फ़िल्म का हिस्सा बनाने की कोशिश की गई है।

अगर आप संजय दत्त के फैन हैं और बाप-बेटी के रिलेशन पर बनी एक इमोशनल कर देने वाली फिल्म देखना चाहते हैं, तो इस वीकेंड भूमि आपको निराश नहीं करेगी।

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