सचिन: अ बिलियन ड्रीम्ज़ मूवी रिव्यू


सचिन: अ बिलियन ड्रीम्ज़ मूवी रिव्यू

 

हमारी रेटिंग 3.5 / 5
पाठकों की रेटिंग   4 / 5
कलाकारसचिन तेंडुलकर, अंजलि तेंडुलकर, मयूरेश पेम
निर्देशक जेम्स अर्स्किन
मूवी टाइपBiography
अवधि2 घंटा 19 मिनट
स्टोरी- इस स्पोर्ट्स डॉक्युमेंट्री कम ड्रामा फिल्म में सचिन तेंडुलकर अपना ही किरदार निभा रहे हैं जिसमें सचिन की लाइफ के साथ ही विश्व क्रिकेट के इतिहास की सबसे बड़ी घटना को दिखाया गया है।

रिव्यू- जब कोई शख्स क्रिकेट की अंतरात्मा और देश के लोगों की सामूहिक आवाज हो तो उस शख्स को फिल्म का मुख्य किरदार बनाकर उस पर फिल्म बनाना मुश्किल काम है। लिहाजा जेम्स अर्स्किन सचिन को मूर्ति के तौर पर सामने रखकर एक ऐसी कहानी कहते हैं जिसमें अस्वाभाविक और बनावटी भक्ति और श्रद्धा दिखती है।

सचिन के बचपन के बारे में देखना और जानना मजेदार है। वैसे फुटेज जिसमें सचिन अपने पर्सनल स्पेस में अपनी पत्नी अंजली, बच्चे अर्जुन, सारा और बाकी परिवार के सदस्यों और दोस्तों के साथ दिख रहे हैं, यह उस तरह का पल है जब फैन्स जोर जोर से सचिन का नाम चिल्ला रहे हों। सचिन को इस फिल्म के सूत्रधार के रूप में देखना अतिरिक्त बोनस की तरह है जो दर्शकों को अपनी जीत के साथ ही चोट के सफर पर भी लेकर जाते हैं।

तेंडुलकर के लिए पागल उनके फैन्स के लिए वह क्षण भी दिल थाम लेने वाला है जब क्रिकेट के इतिहास में सचिन की शुरुआत का दृश्य दिखाया जाता है। वह क्षण जब 1989 में हुए एक एग्जिबिशन मैच में सचिन ने पाकिस्तान के अब्दुल कादिर के 1 ओवर में 4 छक्के जड़े थे। इसके अलावा फिल्म में एक और कभी न मिटने वाली याद को भी ताजा किया गया है जब 1998 में चेन्नै टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सचिन ने शेन वॉर्न की इतनी धुनाई की थी कि वह पंचिंग बैग की तरह महसूस कर रहे थे।

हालांकि सचिन की उपलब्धियां इतनी ज्यादा हैं कि उसे एक फिल्म में समेटना मुश्किल है। निंदा करने वाले यह बात भी कह सकते हैं कि ये सारे फुटेज तो यूट्यूब पर मौजूद है जिसे कभी भी देखा जा सकता है लेकिन वैसे लोग जिनके लिए सचिन एक इमोशन है उनके लिए इस तरह के सभी फुटेज को बड़े पर्दे पर एक साथ बिना सर्च बटन को दबाए देखना बेशकीमती है।

रुकिए, इस फिल्म का झटका देने वाला पक्ष भी है। क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंडुलकर से जुड़े सभी विवादों को इस फिल्म में चमक-दमक के साथ दिखाया गया है। सचिन के डाई हार्ड फैन्स इस बात को स्वीकार करने के लिए तैयार हैं कि हो सकता है उनके भगवान की भी कोई कमजोरी रही हो। लेकिन इस फिल्म में इस तरह का कोई चांस नहीं लिया गया। कुछ बेहद अहम मैचों में सचिन का खराब प्रदर्शन और अपने असभ्य सीनियर्स पर किसी तरह का कोई कमेंट न करना, इस तरह की कुछ घटनाएं हैं जिन्हें क्षण भर के लिए बस छूआ गया है।

सचिन की इस कहानी में कमेंटेटर्स, क्रिटिक्स और उनके साथी खिलाड़ी धोनी, कोहली, गांगुली, सहवाग और हरभजन सभी मास्टर ब्लास्टर की स्तुति करते नजर आते हैं। शैक्षणिक दृष्टि से देखें तो यह फिल्म बेहद अहम है क्योंकि एक ऐसा देश जिसकी आत्मा में क्रिकेट बसता है वहां यह फिल्म हमें याद दिलाती है कि विलक्षण प्रतिभा के धनी लोग भले ही पैदा होते हों लेकिन वह अपनी दृढ़ता, धैर्य और तैयारी से ही सचिन तेंडुलकर बनते हैं।

मूवी मसाला के सेक्‍शन


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